शनिवार, 11 नवंबर 2017

आशिकी 

कल जो मिला किताब में एक सूखा हुआ ग़ुलाब 
न जाने क्यों आ  गए दिल में हज़ारों सवालात 

गुज़रे हुए लामहो की कसक याद आ गयी 
सीने में थी जो दफ़न वो मोहब्बत याद आ गयी 

तुझे हाशिल न कर पाने का मलाल याद आगयी 
तुझसे  वो पहली सी मुलाक़ात याद आगयी ... !

रविवार, 28 अक्टूबर 2012

जाने क्यूँ अक्सर ऐसा होता है?


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जाने क्यूँ अक्सर ऐसा होता है?
ओस की एक बूँद की चाह में मुर्झाया पुष्प भी खड़ा रहता है!
तन्हाई की शाम ढलती है मगर फिर से-
सुबेहा धुँध अंधेरा छाया रहता है!!

ओस की एक बूँद ने मुर्झाये पुष्प को आस् दिया,
जी ले हर क्षण – कहकर जिंदगी का प्यास दिया!
फिर से ललक जगी ज़िंदगी की उस पुष्प के अंदर,
जानकार परिणाम भी पुष्प ने अभिशाप लिया!!
ओस की बूँद ने दी ताजगी उस पुष्प को,
पुष्प भूल गया एक पल के लिए, गुजरे हर एक पल को!
भर गयी पुष्प की आँखें देख् कर ओस का हर एक अपनापन,
सोचा, जी ले आज, देखेंगे जो होगा, जब बिछरेंगे कल को!!
ओस की चाहत थी हर एक मुर्झाये को आस् दिलाना,
एक मुर्झाये पुष्प से किसी का क्य वास्ता?
पुष्प भी जनता था कि वो नहीं किसी के काबिल,
तमन्नाओ को कर दफन, ग़ुम हो जा अपनी बेबसी में ए शाहिल!

शुक्रवार, 11 मई 2012



  
यहाँ मैंने ज़िन्दगी को बहुत पास देखा है
हर भटकने वाले को यहीं आस-पास देखा है ।
हर मंज़र यहाँ हसीन, पर
हर दिल को उदास देखा है
यह शहर तो है इंसानों का
पर मैंने पत्थरों का अहसास देखा है
यहाँ मैंने ज़िन्दगी को बहुत पास देखा है ।
हर तरफ यहाँ मयखाना ही नज़र आता है
पर हर शय के होठों पर इक ‘भटकती’ प्यास देखा है
यहाँ कौन करता है दिल की बात “सरफ़रोश”
हर जज्बात को यहाँ हताश देखा है
यहाँ मैंने ज़िन्दगी को बहुत पास देखा है ।
लाख दुश्मन हो ज़माने की हवा, लेकिन
हर परिंदे को मिलाता हुआ उसका आकाश देखा है
यहाँ मैंने ज़िन्दगी को बहुत पास देखा है
हर भटकने वाले को यहीं आस-पास देखा है ।

गुरुवार, 22 मार्च 2012

फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,


फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती, 

फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती, 

सुर्ख गुफूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,
 

सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,

सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती

,
दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,


काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,
 

जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,
 

रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,
 

रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,
 

तन्हाई में सहारा है दोस्ती, 

मझधार में किनारा है दोस्ती,
 

जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,
 

किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,
 

हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,
 

हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,
 

कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की वरना इस जमींलाब की महक है दोस्ती,
 

सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,
 

दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,
 

काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,
 

जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,
 

रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,
 

रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,
 

तन्हाई में सहारा है दोस्ती,
 

मझधार में किनारा है दोस्ती,
 

जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,
 

किसी-किसी के नसीब में है दोस्ती.......
                                                                      --------किसी-किसी के नसीब में है दोस्ती